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आधी कविता और अधूरा कवी !!

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कभी जी है ज़िन्दगी जो हो आधी ||

जहाँ आधी हो नज़र और आधा नज़ारा ||

जहाँ आधी हो मंज़िल और आधा सफरनामा ||

जहाँ आधी हो मोहब्बत और आधा फ़साना ||

जहाँ आधी हो रुस्वाई और आधा मनाना ||

जहाँ आधी हो साँसे और आधा मुस्कुराना ||

……………………………………………………

वहां पूरा हूँ मैं जहाँ आधा है ज़माना ||

कभी जी है ज़िन्दगी जो हो आधी ||

16 thoughts on “आधी कविता और अधूरा कवी !!”

  1. Oh my god this is seriously amazing…
    And yes …. हाँ जी है । ऐसी शाम जहाँ आधी थी साँसे और आधा था मुस्कुराना ।।।

    Liked by 1 person

    1. धन्यवाद अम्बरधरा ।🙏🙏🙏
      वाह! क्या खूब लिखा है।
      बहुत आभार आपकी आधी पंक्ति के लिये, जिसने पूरी की है मेरी कविता।।😂😂😂

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